किराने की दुकान तक
जब तब और अब के बीच का सफर किराने की दुकान तक जाना मेरे और तुम्हारे संदर्भों में अलग-अलग होते है बचपन मैं लालायित रहता है बालमन , मनाहीं में किशोरमन तरुणाई में अदद रौब हम अब बच्चे नहीं अकेले जा सकते है , दोस्त के साथ जायेंगे स्कूटर बाइक भी तो है तभी दो दिन का अंतराल अरे माँ , भैया को कहे दो या श्यामा को कह दो , हमारे पास समय नहीं है