सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

बाल कविता

हाल की पोस्ट

सफरनामा

उठो देखो आसमान की नीलिमा  वे  घुँघराले फाहे बादल जिस तरह से आसमाँ में  अपनी गति से  चले जा रहे है  तुमको भी चलना है , विश्राम  का मतलब ठहरना  नहीं  है अपनी  ऊर्जा   को  संयत  करना  है

यहीं है

सबकुछ  आँखों  के  सामने  प्रत्यक्ष  उजला  है नजर  उठाकर  देखना  तो  होगा   जिसके  लिए  अपने  घर  से  इतनी  दूर   अजनबी   शहर  में  चले  आये  है कैसा  बैर  है  ?  लड़ाई  भी  नहीं  है भीतर  का   प्रकाश  ही  तो  अपनी  मंजिल  है

माँ के लिए

बड़े दिनों के बाद जेहन में बनके आज ये ख्याल आया है कि तेरी मुस्कारहटों पे ये दिल कई बार निसार हो आया है  तेरी बातों का हमेें ये एहसास हो आया है कि तेरी मुस्कराहटों पे ये दिल कई बार निसार हो आया है  राह की छाँवों बनके जो तुम यों ही साथ में साथ बन चल दी थी 

बदरा

जहाँ अभी कजरी के बोल तीखे - मीठे गाये जाते है सावन के झूले , हरियल की मनुहार लागी है  इठलाता - बलखाता वह सरल सलोना श्रृंगार  भींगता मननयन आज भी है उस करुण रस में ज्यों दूब भींगती प्रतीक्षा की लंबी अवधि वार गोरी का सजान है अभी उस पार ...

बारिश

बारिश की बूँदें भीगती - भीगाती घर में एक अबोध चंचला बच्ची की तरह घुसी चली आई है उसके लिए सबकुछ जाना - पहचाना था दीवारें , लाॅन की घास गमले में लगे पौधे  बरामदे की गली से सटा मिट्टी का गोल चबूतरा और क्यारियाँ उनमें हँसते और झूमते - गाते नन्हे - नन्हे से रंग - बिरंगें फूल और  हरियाली । वहीं  किनारे दीवार से सटा पाइप लगा है जिससे छत्त का सारा पानी जिस वेग और आवाज के साथ नीचे  उतर रहा है लगता है कि पानी के निकास के लिए बनाई गई नाली के जगह पर ईट लगा दी जाये तो  बच्चों के लिए खासा स्विमिंग पूल तैयार हो जायेगा।  जैसाकि छोटे में अक्सर हम सब बच्चे बारिश मे किया करते थे दो - दो घंटें तक पानी में खेलते रहते थे नीचे नदिया ऊपर बारिश की मेहरबानी पर शायद ही हमें दो घंटें से ज्यादा पानी में रहने दिया जाता था क्योंकि इसके बाद  सबकी मम्मी बारी - बारी से सबको आवाज लगाती की अब उतर आओ नीचे , बहुत भीग चुके जल्दी से नीचे आकर दो लोटा साफ पानी डालकर  कपड़े बदल लो पर बच्चे तो बच्चे और बारिश तो बारिश जब तक  कोई ऊपर आकर हमारे बनाए गए तालाब को देखना लेता और बदले में...

और चलते जाना

जो मन न करे तो क्या करे इस तंगहाल जिंदगी की  ओर ध्यान  किस कदर ले जाए  , हालातों का मारा बेवजह का यात्री वर्तमान की  सच्चाईयाँ - वह