मंजिल तुम हमारी
मायने रखती है तुम्हारी खुद की खुशी तुम्हारी अप्रतिबंधित मुस्कान उफ , खिलखिलाकर हँसना जरुरत है जिंदगी की बंदगी उतनी ही जितनी मौत जीवन को स्वीकार्य है पाथर तो नहीं , पाथर पर भी
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