हीन , मगर नहीं किसने कहा कि तुम हीन हो और अगर कोई अपने में कहता है तो कह ले , किसी के कहने मात्र से तो कोई हीन नहीं हो जाता है , हीन तो तुम तब कहलाओगे जबकि तुम अपने को हीन मानोगे , अपने भीतर छिपे आत्मविश्वास और रचनात्मिका शक्ति को जब तक तुम संबल न दोगे , तब तक प्रभु भी कुछ नहीं कर सकते , क्योंकि ईश्वर की मदद पाने के लिए पहले हमें अपने-आप से प्रयास करना पड़ता है ।
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