पृथिवीसूक्त
सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः ।। संदर्भ - अथर्ववेद 12 वाँ काण्ड प्रथम सूक्त दृष्टा ऋषि अथर्वा देवी भूमि ।
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