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मार्च, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मंजिल तुम हमारी

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मायने रखती है तुम्हारी खुद की खुशी  तुम्हारी  अप्रतिबंधित मुस्कान  उफ , खिलखिलाकर  हँसना  जरुरत है जिंदगी की बंदगी उतनी  ही  जितनी मौत जीवन को स्वीकार्य है पाथर तो  नहीं , पाथर पर भी

चिलबिल

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चिलबिल सी आतुर निडर आजाद उन्मुक्त  उड़ान  देर तक हवा में डोलती रही किसी दिन देखा मैंने उसे मिट्टी के अंक में अंकुए पात खिले हुए  मुस्कुराती हुई  नवनीत सम पल्लव को हिलाती हुई ।

माटी के मोल

एक बालपन कपोल दंतविहीन जरा हुआ  प्रथम क्रीड़ा तोतली अब मजदूरी की हंसी प्रकृति अद्भुत  द्रवित हृदय विदारा विश्रांत भी उसी ममतामय छाँव तले

कभी तुमसे इंकार

कोरे कागज की निःशब्द  भाषा टकटकी   बाँधे कुछ लिखने को कहती है सुख - दुख , आशा - निराशा राग - विराग , तृष्णा और तोष वीर ओज सहृदय माधुर्य  प्रेमभाव पल्लवित ऋतुनय

हैप्पी होली

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रंग  बहार  जिंदगी हँसी  खुशी  सब तुम्हारे  साथ  सदा  दुओं  में रंगीन  रहे  बदरा जीवन  उत्सव  नव  नूतन  बयार  रिमझिम  बौछार  फूलों  सी  महक निर्दोष  चहक