जब कभी यूँही सही
हँसी की तलाश लौट आओ भीतर है खोज लाओ मुढ़ भाव को छोड़कर तनिक मार्ग पर तो आओ कुछ बात है दिल की बेझिझक कह जाओ , सुनेंगे चुपचाप घंटें - दो घंटे चाहे जितनी लंबी हो बात दो शब्द या केवल मौन कुछ भी प्रश्न नहीं खड़े करेंगे , स्वत्व बोध की नव परिभाषा गढेंगे