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धूप की महक

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धूप की महक   हवा में आती खिड़कियों के   बंद किवाड खोल अस्त - व्यस्त से घर को जगाती तपिश आँसू की बदली छटती हुई  बंसत की बहार   जल्द अपने पीले

उस खत को मेरा शुक्रिया ..!

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खत लिखना है मुझे अपनी नादानियों नासमझी बेवकूफियों का जिन पर जमाना हमेशा से हँसता आया उन  शर्तिया  पसंद - नापसंद उलाहनों  का