सुबह भोर उठती है
सुबह भोर उठती है सर्दी - गरमी चाहे जैसे दिन हो खाने बनाने बर्तन माँज कपड़े धोती झाडू ले बहुराती आंगन पोछा मार फर्श चमकाती कोनों - कोनों का रखती ध्यान समय की चौकसी में पूरा करती सारे प्रबंध रखती सबकी पसंद - नापसंद का ध्यान भक्ति की भावना में डूबी करती ईश आराधन