मोबाइल पर बहुत कुछ अच्छा भी होता है


 सौजन्य  : दूरदर्शन झारखंड


मन  मंदिर  प्रभु  का  सुंदर  धाम
भक्ति  की  पावन  ज्योत  अभिराम
तम  की कारा से  करती  जो  मुक्त 
तुम  संघर्ष   की  अमिट  गाथा
वीरता  प्रेम  की  अमित भाषा
दया  स्नेह   से  पुलक  वत्सल
सुप्त  न  अब  खोए  , यूँ  सोये  रहो
प्रात उदित  नवजीवन की  बेला यूँ खिलती
रेशों  रेशों  , धानों  धानों  छिटक  तिनके
अंक भर अपने प्रात लेती ,  हिये की संवेदी
निकृष्ट विचार न  मैल  रहे  ,  आत्मशोधन की 
दीप वर्तिका मन मंदिर चलो मिलकर प्रज्ज्वलित करे ।


टिप्पणियाँ