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पारिजात

पारिजात

चंचलता  चित्त  की  चमक   सुहाती ज्योतिपुँज  की  गहराई  में  डूबी  केसरी  कुँज   श्वेतमय   पारिजात  प्रिय सर्मिपत  हो  जाना  पूर्ण  रुप  में खुले  दिल  से  अपनी  सुरभि  को लहलहाना  ,  क्षुब्ध  मन  को  मिले  जो  विश्राम  पथिक   की    आशा - निराशा  अंतर्द्वंद  को  आराम