वेणु अपनी गति की चाल तेज कर पूरे दमखम के साथ रोड़ के किनारे किनारे चली जा रही है । हम्म…काफी देर जो हो गई है । पहले दिन ही लेट कैसे चलेगा ….सोचती हुई अपने पैरों से रास्ते को और जल्दी जल्दी नापने लग जाती है । जैसे कि उसे किसी मैराथन में दौड़ लगानी है , क्या लगा रही है , हालाकि इस रास्ते का भी उसे लिहाज रखना है अतः अब जैसे भी हो किसी तरह समय पर पहुँचना है । ये लो संगीत नाट्य कला अकादमी का केंद्र नजर आ गया और जिसे देख वेणु को कुछ
प्रियाहिंदीवाइब ब्लाॅग पर आपको हिन्दी साहित्य से सम्बन्धित विषयों पर जानकारी प्राप्त करायी जाएगी । आपको यहाँ पर हिन्दी साहित्य से जुड़े प्रश्नों का समाधान देने का प्रयास किया जाएगा । विविध विषयों यथा - पर्यावरण, शिक्षा, मनोरंजन , रचनात्मक लेखन आदि पर आधारित लेख प्राप्त होंगे । यहाँ पर आपको भारतीय संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलूओं के सुंदर और अद्भुत रंग भी देखने को मिलेंगे ।