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संदेश

बाल कविता

बाल  कविता  सी  सुंदर  धरा नीलांबर  और   धानी  छटा बादल  उड़ते  आकाश  में  दूर  - दूर चिड़ियाँ   भी   संग   उड़ती   उनके  छोटे -  छोटे  पंखों   की  ऊँची  उड़ान हौंले - हौंले  , सरसर - फुर्र -फुर्र चिड़ियाँ  रानी  सुनो  प्यारी   तुम  आना  मेरे  घर  भी गुनगुन  करके  गाना  गाना

सफरनामा

उठो देखो आसमान की नीलिमा  वे  घुँघराले फाहे बादल जिस तरह से आसमाँ में  अपनी गति से  चले जा रहे है  तुमको भी चलना है , विश्राम  का मतलब ठहरना  नहीं  है अपनी  ऊर्जा   को  संयत  करना  है

यहीं है

सबकुछ  आँखों  के  सामने  प्रत्यक्ष  उजला  है नजर  उठाकर  देखना  तो  होगा   जिसके  लिए  अपने  घर  से  इतनी  दूर   अजनबी   शहर  में  चले  आये  है कैसा  बैर  है  ?  लड़ाई  भी  नहीं  है भीतर  का   प्रकाश  ही  तो  अपनी  मंजिल  है

माँ के लिए

बड़े दिनों के बाद जेहन में बनके आज ये ख्याल आया है कि तेरी मुस्कारहटों पे ये दिल कई बार निसार हो आया है  तेरी बातों का हमेें ये एहसास हो आया है कि तेरी मुस्कराहटों पे ये दिल कई बार निसार हो आया है  राह की छाँवों बनके जो तुम यों ही साथ में साथ बन चल दी थी 

बदरा

जहाँ अभी कजरी के बोल तीखे - मीठे गाये जाते है सावन के झूले , हरियल की मनुहार लागी है  इठलाता - बलखाता वह सरल सलोना श्रृंगार  भींगता मननयन आज भी है उस करुण रस में ज्यों दूब भींगती प्रतीक्षा की लंबी अवधि वार गोरी का सजान है अभी उस पार ...

बारिश

बारिश की बूँदें भीगती - भीगाती घर में एक अबोध चंचला बच्ची की तरह घुसी चली आई है उसके लिए सबकुछ जाना - पहचाना था दीवारें , लाॅन की घास गमले में लगे पौधे  बरामदे की गली से सटा मिट्टी का गोल चबूतरा और क्यारियाँ उनमें हँसते और झूमते - गाते नन्हे - नन्हे से रंग - बिरंगें फूल और  हरियाली । वहीं  किनारे दीवार से सटा पाइप लगा है जिससे छत्त का सारा पानी जिस वेग और आवाज के साथ नीचे  उतर रहा है लगता है कि पानी के निकास के लिए बनाई गई नाली के जगह पर ईट लगा दी जाये तो  बच्चों के लिए खासा स्विमिंग पूल तैयार हो जायेगा।  जैसाकि छोटे में अक्सर हम सब बच्चे बारिश मे किया करते थे दो - दो घंटें तक पानी में खेलते रहते थे नीचे नदिया ऊपर बारिश की मेहरबानी पर शायद ही हमें दो घंटें से ज्यादा पानी में रहने दिया जाता था क्योंकि इसके बाद  सबकी मम्मी बारी - बारी से सबको आवाज लगाती की अब उतर आओ नीचे , बहुत भीग चुके जल्दी से नीचे आकर दो लोटा साफ पानी डालकर  कपड़े बदल लो पर बच्चे तो बच्चे और बारिश तो बारिश जब तक  कोई ऊपर आकर हमारे बनाए गए तालाब को देखना लेता और बदले में...

और चलते जाना

जो मन न करे तो क्या करे इस तंगहाल जिंदगी की  ओर ध्यान  किस कदर ले जाए  , हालातों का मारा बेवजह का यात्री वर्तमान की  सच्चाईयाँ - वह 

प्रेम की बुनाई

और मुझे अच्छा लगा , तुम्हारा यह पूछना  मैं कैसी हूँ और दर्पण ने मुस्कुराकर  जान लिया  ये सौंदर्य सादगी में बुना  जिम्मेदारियों की टोकरी बोझ  , नहीं   उसकी  बैंबू  से  बनाई  गई   प्रेम  की  बुनाई  थी अलस्सुबह  से  शाम तक का पूरा सफर कहानी  हकीकत  की  थी सपने  के रंग जिन पर चढ़े थे उसी कोमलता की लिलाई लिए  जैसे  नर्म स्फोट  खुलते  पल्लव  पात जैसे  माँ  बाजार  से  लाए  गए  गेंहूँ  को धोती थी और  निथरने  के  लिए  उस  टोकरी  में  रख  देती  थी वैसे  ही  उसको  देखना   प्रेम  के  आँचल  की   झलकारी सी   लिलाई  ,   उसके  प्रत्येक  कार्य  में   मिल  जायेगी और  आज उसकी  यह  आभा  अपने  लिए  और  भी  सुंदर  लग रही है जो  दुनिया  मैं...

तुम्हारे सुंदर सपने है

हर  हार  को  जीत  का  रुप  दे  देती  हो जितनी  सहजता  से  तुम  सबका ध्यान रख लेती हो उतनी  सहजता  की  मांग  है , अपने  खोए  सपनों  को पूरा करो रास्ते पर चलते समय लोग  क्या  सोचेंगे , क्या सोच रहे  है ये  कभी भी तुम्हारे  प्रश्न नहीं रहे है ,  इनसे  प्रभावित होना

शुभप्रभात

जहाँ  से  समय  होकर  निकलता  है वहाँ  देहरी  के  द्वार  दो   टेक  अँखिया द्वंद्व  निर्वतमान   अपने  सपने  बुनती आसमान  के  प्रांगण  में  नीलिमा  की  जादुई   ,   चहक भरे  बक्से का पिटारा आज  अभी  अब  से   शेष  प्रश्नों   के  

मोबाइल पर बहुत कुछ अच्छा भी होता है

 सौजन्य  : दूरदर्शन झारखंड मन  मंदिर  प्रभु  का  सुंदर  धाम भक्ति  की  पावन  ज्योत  अभिराम तम  की कारा से  करती  जो  मुक्त  तुम  संघर्ष   की  अमिट  गाथा वीरता  प्रेम  की  अमित भाषा दया  स्नेह   से  पुलक  वत्सल सुप्त  न  अब  खोए  , यूँ  सोये  रहो प्रात उदित  नवजीवन की  बेला यूँ खिलती रेशों  रेशों  , धानों  धानों  छिटक  तिनके अंक भर अपने प्रात लेती ,  हिये की संवेदी निकृष्ट विचार न  मैल  रहे  ,  आत्मशोधन की  दीप वर्तिका मन मंदिर चलो मिलकर प्रज्ज्वलित करे ।

जब कभी यूँही सही

हँसी की तलाश लौट आओ भीतर है खोज लाओ मुढ़ भाव को छोड़कर  तनिक मार्ग पर तो आओ कुछ बात है दिल की बेझिझक  कह जाओ ,  सुनेंगे  चुपचाप  घंटें - दो घंटे  चाहे जितनी लंबी हो बात  दो शब्द या  केवल मौन  कुछ  भी प्रश्न  नहीं  खड़े  करेंगे ,  स्वत्व  बोध  की नव परिभाषा गढेंगे

माँ

माँ का नाम ही काफी है हर पीड़ा और मुश्किल से बाहर निकलने के लिए मेरी चोट का मरहम माँ ही तो है  सबसे प्यारी हमेशा मेरी ही चिंता में घुलने वाली माँ  देखती हूँ जो तेरा प्यार  मैं  भी  बड़ी बच्ची  तेरी स्नेह  छाँव  में  ही  हर पल  जीवन का गुजारु अभिलाषा मन की , वरदान ईश से और क्या ही मांगू  बस  तुमको  ही  चाहूँ  , तुम्हारा ममताभरा स्पर्श  मीठे स्वर तुम्हारा साथ , तुम्हारा लहराता स्निगध आँचल और ढ़ेर सारा प्यार ।

किराने की दुकान तक

जब तब और अब के बीच का सफर किराने  की  दुकान  तक  जाना मेरे  और  तुम्हारे  संदर्भों  में  अलग-अलग  होते  है बचपन  मैं   लालायित  रहता है बालमन  ,  मनाहीं  में   किशोरमन तरुणाई  में  अदद  रौब  हम  अब  बच्चे नहीं अकेले  जा सकते है , दोस्त के साथ  जायेंगे स्कूटर  बाइक  भी  तो  है   तभी  दो  दिन  का  अंतराल अरे  माँ , भैया को  कहे  दो  या श्यामा  को   कह  दो  , हमारे  पास  समय  नहीं  है 

अनबुझ फिर भी

स्पष्ट है चुप है ताना - बाना उछलती गेंद  घूरती आँख टेसू के लाल फूल  धूप में जलता ग्लोब  निर्मोह बनी अँखिया अपनी - अपनी कहानियों में डूबी हुई  उलझे हुए धागे उनकी उलझी हुई गाँठें दोनों छोर व्यथित टूटे जिंदगी की सीढ़ी ऊपर - नीचे , नीचे - ऊपर

मंजिल तुम हमारी

मायने रखती है तुम्हारी खुद की खुशी  तुम्हारी  अप्रतिबंधित मुस्कान  उफ , खिलखिलाकर  हँसना  जरुरत है जिंदगी की बंदगी उतनी  ही  जितनी मौत जीवन को स्वीकार्य है पाथर तो  नहीं , पाथर पर भी

चिलबिल

चिलबिल सी आतुर निडर आजाद उन्मुक्त  उड़ान  देर तक हवा में डोलती रही किसी दिन देखा मैंने उसे मिट्टी के अंक में अंकुए पात खिले हुए  मुस्कुराती हुई  नवनीत सम पल्लव को हिलाती हुई ।

माटी के मोल

एक बालपन कपोल दंतविहीन जरा हुआ  प्रथम क्रीड़ा तोतली अब मजदूरी की हंसी प्रकृति अद्भुत  द्रवित हृदय विदारा विश्रांत भी उसी ममतामय छाँव तले

कभी तुमसे इंकार

कोरे कागज की निःशब्द  भाषा टकटकी   बाँधे कुछ लिखने को कहती है सुख - दुख , आशा - निराशा राग - विराग , तृष्णा और तोष वीर ओज सहृदय माधुर्य  प्रेमभाव पल्लवित ऋतुनय

हैप्पी होली

रंग  बहार  जिंदगी हँसी  खुशी  सब तुम्हारे  साथ  सदा  दुओं  में रंगीन  रहे  बदरा जीवन  उत्सव  नव  नूतन  बयार  रिमझिम  बौछार  फूलों  सी  महक निर्दोष  चहक