अनबुझ फिर भी
स्पष्ट है चुप है ताना - बाना उछलती गेंद घूरती आँख टेसू के लाल फूल धूप में जलता ग्लोब निर्मोह बनी अँखिया अपनी - अपनी कहानियों में डूबी हुई उलझे हुए धागे उनकी उलझी हुई गाँठें दोनों छोर व्यथित टूटे जिंदगी की सीढ़ी ऊपर - नीचे , नीचे - ऊपर