सोचती हूँ कि फिर एक बार छोटी हो जाओ नहीं बनना बड़ा , हमारा बचपन ही था भला पर जिस गाड़ी पर हम बैठे है रुकती ही नहीं मुझे मुड़कर देख मुस्काना होता है यादों की चाँदनी रात में टिमटिमाते सितारों को देखना होता है कैसे होती थी सुबह स्कूल जाने को सुहानी सुबह
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