हर हार को जीत का रुप दे देती हो
जितनी सहजता से तुम सबका ध्यान रख लेती हो
उतनी सहजता की मांग है , अपने खोए सपनों को पूरा करो
रास्ते पर चलते समय लोग क्या सोचेंगे , क्या सोच रहे है
मेरी बहना ! तुम्हारा औचित्य नहीं , तुम उन्मुक्तता की
रचना शांति से द्वार पर चौक पूरिती , उतनी ही लयबद्ध
भावमग्न समर्पित रहो , क्योंकि ये रास्ते तुम्हारे अपने है
तुम्हारी आँखों में पले तुम्हारे सुंदर सपने है ।

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