माँ

माँ का नाम ही काफी है हर पीड़ा और मुश्किल

से बाहर निकलने के लिए मेरी चोट का मरहम माँ ही तो है 

सबसे प्यारी हमेशा मेरी ही चिंता में घुलने वाली

माँ  देखती हूँ जो तेरा प्यार  मैं  भी  बड़ी बच्ची 

तेरी स्नेह  छाँव  में  ही  हर पल  जीवन का गुजारु

अभिलाषा मन की , वरदान ईश से और क्या ही मांगू 

बस  तुमको  ही  चाहूँ  , तुम्हारा ममताभरा स्पर्श  मीठे स्वर

तुम्हारा साथ , तुम्हारा लहराता स्निगध आँचल और ढ़ेर सारा प्यार ।


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