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मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुम्हारे सुंदर सपने है

हर  हार  को  जीत  का  रुप  दे  देती  हो जितनी  सहजता  से  तुम  सबका ध्यान रख लेती हो उतनी  सहजता  की  मांग  है , अपने  खोए  सपनों  को पूरा करो रास्ते पर चलते समय लोग  क्या  सोचेंगे , क्या सोच रहे  है ये  कभी भी तुम्हारे  प्रश्न नहीं रहे है ,  इनसे  प्रभावित होना

शुभप्रभात

जहाँ  से  समय  होकर  निकलता  है वहाँ  देहरी  के  द्वार  दो   टेक  अँखिया द्वंद्व  निर्वतमान   अपने  सपने  बुनती आसमान  के  प्रांगण  में  नीलिमा  की  जादुई   ,   चहक भरे  बक्से का पिटारा आज  अभी  अब  से   शेष  प्रश्नों   के  

मोबाइल पर बहुत कुछ अच्छा भी होता है

 सौजन्य  : दूरदर्शन झारखंड मन  मंदिर  प्रभु  का  सुंदर  धाम भक्ति  की  पावन  ज्योत  अभिराम तम  की कारा से  करती  जो  मुक्त  तुम  संघर्ष   की  अमिट  गाथा वीरता  प्रेम  की  अमित भाषा दया  स्नेह   से  पुलक  वत्सल सुप्त  न  अब  खोए  , यूँ  सोये  रहो प्रात उदित  नवजीवन की  बेला यूँ खिलती रेशों  रेशों  , धानों  धानों  छिटक  तिनके अंक भर अपने प्रात लेती ,  हिये की संवेदी निकृष्ट विचार न  मैल  रहे  ,  आत्मशोधन की  दीप वर्तिका मन मंदिर चलो मिलकर प्रज्ज्वलित करे ।

जब कभी यूँही सही

हँसी की तलाश लौट आओ भीतर है खोज लाओ मुढ़ भाव को छोड़कर  तनिक मार्ग पर तो आओ कुछ बात है दिल की बेझिझक  कह जाओ ,  सुनेंगे  चुपचाप  घंटें - दो घंटे  चाहे जितनी लंबी हो बात  दो शब्द या  केवल मौन  कुछ  भी प्रश्न  नहीं  खड़े  करेंगे ,  स्वत्व  बोध  की नव परिभाषा गढेंगे