बाल कविता सी सुंदर धरा
नीलांबर और धानी छटा
बादल उड़ते आकाश में दूर - दूर
चिड़ियाँ भी संग उड़ती उनके
छोटे - छोटे पंखों की ऊँची उड़ान
हौंले - हौंले , सरसर - फुर्र -फुर्र
चिड़ियाँ रानी सुनो प्यारी
तुम आना मेरे घर भी
गुनगुन करके गाना गाना
नदी की जलधारा लेती हिलोर
कमल खिलते गुलाबी ठोर
नदिया की शीतलताई प्यारी
चलती ठंडी - ठंडी पुरवाई
वह लगे है वृक्ष बड़े - बड़े
नीम , बरगद , कदंब , कनेर
चंपा , सप्तपर्णी , जूही परागे घने - घने
गुलशन से फूल रंग - बिरंगीं खिले - खिले
सोनू पींकी रीना मीना और चानू
चलो चलते है मिलकर सब पिकनिक
अम्मा लेकर आई है मीठा मालपुआ
दही जलेबी रबड़ी मथुरा का पेड़ा
आगरा का पेठा मीठा - मीठा अह्हा !

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