सबकुछ आँखों के सामने प्रत्यक्ष उजला है
नजर उठाकर देखना तो होगा
जिसके लिए अपने घर से इतनी दूर
अजनबी शहर में चले आये है
कैसा बैर है ? लड़ाई भी नहीं है
भीतर का प्रकाश ही तो अपनी मंजिल है
पल - पल परीक्षा खुद ही सवाल और खुद ही जबाव
आत्म - आलोचक बनकर झूठ को मात देना होगा
रोशनी का अर्थ , पयार्य यहीं है , उस तक का मार्ग भी यही है
सबकुछ प्रत्यक्ष सामने यहीं है , उसे देखना तो हमें ही है ।

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