उठो देखो आसमान की नीलिमा
वे घुँघराले फाहे बादल
जिस तरह से आसमाँ में
अपनी गति से चले जा रहे है
तुमको भी चलना है ,
विश्राम का मतलब ठहरना नहीं है
अपनी ऊर्जा को संयत करना है
तुम अपना पूरा समय लो
पर निराशा की रात से दूर हटकर
अपनी अंदर की रोशनाई को महसूस करो
कई बार होता है जब मन विचलित होता है सामान्य है
तुम भीतो न , आगे तुम्हारी हिम्मत और
समय की अनवरत गतिशीलता का चक्र जारी है
साझी साथी क्यों न चले और क्योंकर रुके
सरगम जीवन का गीत कोई एक सीधी गाथा तो नहीं है
पग - पग एक स्वप्न का साकार रुप धरा पर पाँव रखता है
क्षणिकता का वह क्षण भी प्यारा रहता है
उत्साह को अपने अंदर लाना ही जी जाना है
उदासी को मुस्कुराहट की तालीम सीखाना
मुसीबतों से आगे बढ़ जाना है
मेरे मुसाफिर यहीं तरह सफरनामा है ।

ब्लॉग की दूसरी वर्षगाँठ के अवसर पर आप सभी के साथ और स्नेह के लिए दिल से शुक्रिया 🌸🥰🙏
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