जन्मदिन मुबारक हो प्रियंका


सोचती हूँ  कि फिर एक बार  छोटी हो जाओ 

नहीं  बनना बड़ा  , हमारा बचपन  ही  था भला

पर  जिस  गाड़ी  पर  हम  बैठे  है  रुकती  ही  नहीं

मुझे  मुड़कर  देख  मुस्काना  होता  है 

यादों  की  चाँदनी  रात  में

टिमटिमाते  सितारों  को देखना होता है

कैसे होती थी सुबह 

स्कूल  जाने  को  सुहानी  सुबह

कांधे  पर  नहीं  था  बोझ 

हाँ , मगर  गणित  मुझे  तब  भी  अटकाती  थी

कितना बदल  जाता  है

और  मैं  हारती  हूँ 

पर  मुझे  स्वीकार  तो  करना  है

ऋतु परिवर्तन  सदा  ही  रहा

इस जन्मदिन  बस  चाहूँ  यहीं

कोई  लाकर  दे  दे  मुझे  बचपन  का  वो भोलापन  फिर  वहीं ।


टिप्पणियाँ

  1. जन्मदिन की शुभकामनाएं प्रियंका जी:))
    खुश रहिये, स्वस्थ रहिये मस्त रहिये।
    बहुत प्यारी सी अभिव्यक्ति।
    सस्नेह
    सादर।
    -----
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १७ फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. धन्यवाद श्वेता जी हृदय से आभार 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. जन्मदिन की शुभकामनाएं
    सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर भाव ... जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें ...

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह बहुत सुंदर
    जन्मदिन की शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर बेटा

    जवाब देंहटाएं

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