माँ का नाम ही काफी है हर पीड़ा और मुश्किल
से बाहर निकलने के लिए मेरी चोट का मरहम माँ ही तो है
सबसे प्यारी हमेशा मेरी ही चिंता में घुलने वाली
माँ देखती हूँ जो तेरा प्यार मैं भी बड़ी बच्ची
तेरी स्नेह छाँव में ही हर पल जीवन का गुजारु
अभिलाषा मन की , वरदान ईश से और क्या ही मांगू
बस तुमको ही चाहूँ , तुम्हारा ममताभरा स्पर्श मीठे स्वर
तुम्हारा साथ , तुम्हारा लहराता स्निगध आँचल और ढ़ेर सारा प्यार ।
बहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंमां से बढ़कर कोई नहीं जग में ,,,,,
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 10 मई 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंवंदन
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया प्रिया जी 👌
हर दर्द की दवा है
मेरा तो खुदा है माँ!
हरेक की ये छाँव बनी रहे! हार्दिक शुभकामनायें 🙏
सुंदर सृजन, माँ को नमन
जवाब देंहटाएंसुन्दर
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