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पारिजात

जिंदगी की राहें

हर दिन की तरह आज का भी दिन अपने में नया है अनेक संभावनाओं अवसरों को लिए आज का दिन भी दरवाजे पर दस्तक दिए खड़ा है , कल पर छोड़कर क्या फायदा कल किसने देखा है ? तो फिर जरुरत है तो बस अपने आज को संवारने की , बीते कल से उतना ही लो जितना की ठीक हो जिंदगी की गाड़ी अपनी सही रफ्तार के साथ चलती रहे वर्ना ज्यादा बोझा लेकर चलने से सफर का कोई मतलब ही नहीं रहे जाता है

और इसी प्रकार उस कल की जो अभी तक आया ही नहीं जिसके वास्तविक यथार्थ से आप अपरिचित है उसकी चिंता में घुन की तरह धुनना और अपने निकट वर्तमान की बलि चढ़ा देना अपने भविष्य के साथ एक तरह से खिलवाड़ ही है । जो बीत गया और जिसका अभी कुछ पता ही नहीं इन दोनों के बीच की अनसुलझी कशमकश जिदंगी को दो राहों पर लाकर खड़ा कर देती है , इन दोनों ही राहों में आपका रास्ता कोई नहीं है , ये तो मात्र दुविधा है । आपका वर्तमान आपका आज सदैव आपको अपने आज में स्थित होकर नित नूतनता नवाचार नव उम्मीद नव सृजन नव निर्माण की राह देता है अब आपको ही तय करना होगा कि आप किस राह को चुनते है ।


टिप्पणियाँ

  1. ज़िंदगी के दोराहे अक्सर भ्रमित करते हैं और.तय करना भी कभी -कभी बहुत कठिन होता है कौन सा हमारे लिए सही है स्वविवेक और अंतर्मन के निर्देश पर लिया गया निर्णय सदैव जीवन को नयी नयी दिशा प्रदान करता है।
    सादर।
    -----
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शनिवार १९ जुलाई २०२५ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. हम अक्सर कल के पछतावे या आने वाले कल की चिंता में अपना आज बिगाड़ लेते हैं। आपने सही कहा कि जो बीत गया वो लौटेगा नहीं और जो आने वाला है उसका अभी कोई ठिकाना नहीं। मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगा कि आपने आज की अहमियत पर जोर दिया।

    जवाब देंहटाएं

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