चिलबिल



चिलबिल सी आतुर निडर
आजाद उन्मुक्त  उड़ान 
देर तक हवा में डोलती रही
किसी दिन देखा मैंने उसे
मिट्टी के अंक में अंकुए पात खिले हुए 
मुस्कुराती हुई  नवनीत सम पल्लव को हिलाती हुई ।

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 19 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. प्रकृति, परिवर्तन, पल्लव .. चिलबिल का अर्थपूर्ण बिम्ब ...

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