चिलबिल
आजाद उन्मुक्त उड़ान
देर तक हवा में डोलती रही
किसी दिन देखा मैंने उसे
मिट्टी के अंक में अंकुए पात खिले हुए
मुस्कुराती हुई नवनीत सम पल्लव को हिलाती हुई ।
प्रियाहिंदीवाइब ब्लाॅग पर आपको हिन्दी साहित्य से सम्बन्धित विषयों पर जानकारी प्राप्त करायी जाएगी । आपको यहाँ पर हिन्दी साहित्य से जुड़े प्रश्नों का समाधान देने का प्रयास किया जाएगा । विविध विषयों यथा - पर्यावरण, शिक्षा, मनोरंजन , रचनात्मक लेखन आदि पर आधारित लेख प्राप्त होंगे । यहाँ पर आपको भारतीय संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलूओं के सुंदर और अद्भुत रंग भी देखने को मिलेंगे ।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 19 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 19 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंकुदरत का एक और करिश्मा
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंप्रकृति, परिवर्तन, पल्लव .. चिलबिल का अर्थपूर्ण बिम्ब ...
जवाब देंहटाएं