उठो देखो आसमान की नीलिमा
वे घुँघराले फाहे बादल
जिस तरह से आसमाँ में
अपनी गति से चले जा रहे है
तुमको भी चलना है ,
विश्राम का मतलब ठहरना नहीं है
अपनी ऊर्जा को संयत करना है
तुम अपना पूरा समय लो
पर निराशा की रात से दूर हटकर
अपनी अंदर की रोशनाई को महसूस करो
कई बार होता है जब मन विचलित होता है सामान्य है
तुम भीतो न , आगे तुम्हारी हिम्मत और
समय की अनवरत गतिशीलता का चक्र जारी है
साझी साथी क्यों न चले और क्योंकर रुके
सरगम जीवन का गीत कोई एक सीधी गाथा तो नहीं है
पग - पग एक स्वप्न का साकार रुप धरा पर पाँव रखता है
क्षणिकता का वह क्षण भी प्यारा रहता है
उत्साह को अपने अंदर लाना ही जी जाना है
उदासी को मुस्कुराहट की तालीम सीखाना
मुसीबतों से आगे बढ़ जाना है
मेरे मुसाफिर यहीं तरह सफरनामा है ।

ब्लॉग की दूसरी वर्षगाँठ के अवसर पर आप सभी के साथ और स्नेह के लिए दिल से शुक्रिया 🌸🥰🙏
जवाब देंहटाएंसुंदर सृजन, बहुत बहुत बधाई!
जवाब देंहटाएंसस्नेह स्वागत
हटाएंदरअसल ज़िन्दगी का भी यही सफरनामा है ... बहुत खूब ... बहुत बधाई ...
जवाब देंहटाएंहार्दिक स्वागत एवं आभार !
हटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 13 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंविश्राम का मतलब ठहरना नहीं है
जवाब देंहटाएंअपनी ऊर्जा को संयत करना है।
बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई।
हार्दिक स्वागत एवं आभार !
हटाएंसुंदर | शुभकामनाएं चिट्ठे की वर्षगांठ पर |
जवाब देंहटाएंहार्दिक स्वागत एवं आभार !
हटाएंबहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंहार्दिक स्वागत एवं आभार
हटाएंशुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंधन्यवाद आदरणीय !
हटाएं