सर्द दिनों की रुहानी आहट लिए मौसम का रुख बदला है सिमटा - सिमटा दिन गुलाबी ठंडक लिए सूरज आसमाँ के पट पर खिलने लगे गुलाब मंजरी पर पुलकित पुष्प
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काग़ज़ ने न जाने कितने दिलों को सुकून से भर दिया है, जब उनका सुख-दुख अपनी छाती पर धर लिया है
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 14 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंसही है ,वे कभी इंकार नहीं करते ।
जवाब देंहटाएंबेहद खूबसूरत सृजन
जवाब देंहटाएंसुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति
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