दिन , तारीखें , महीनें , साल निकल जाने वाले है
तुम चलते रहो , एक समय मंजिल तक पहुँच जाओगे
गोया मुस्कराओगे नहीं , मुस्कराओं चलते जाओ
मुसाफिरी अभिमानी नहीं , ईर्ष्या नहीं द्वेष नहीं
न कोई बचकानी शर्त , जीवन का उद्देश्य है
मानवता की पुकार है , जो भीड़तंत्र में सिमटा है
तुम डरते हो , डरना छोड़ो , विश्वास प्रेम का मार्ग है
जिसमें निहित सारा जग - संसार है , इस मार्ग पर
पांथ रुको नहीं , चलते - चलो , चलते - चलो ...

सुंदर
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
जवाब देंहटाएं