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बाल कविता

मोबाइल पर बहुत कुछ अच्छा भी होता है


 सौजन्य  : दूरदर्शन झारखंड


मन  मंदिर  प्रभु  का  सुंदर  धाम
भक्ति  की  पावन  ज्योत  अभिराम
तम  की कारा से  करती  जो  मुक्त 
तुम  संघर्ष   की  अमिट  गाथा
वीरता  प्रेम  की  अमित भाषा
दया  स्नेह   से  पुलक  वत्सल
सुप्त  न  अब  खोए  , यूँ  सोये  रहो
प्रात उदित  नवजीवन की  बेला यूँ खिलती
रेशों  रेशों  , धानों  धानों  छिटक  तिनके
अंक भर अपने प्रात लेती ,  हिये की संवेदी
निकृष्ट विचार न  मैल  रहे  ,  आत्मशोधन की 
दीप वर्तिका मन मंदिर चलो मिलकर प्रज्ज्वलित करे ।


टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर गीत है यह। साझा करने हेतु बहुत-बहुत आभार प्रिया जी।

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  2. आपका भी आभार और स्वागत आदरणीय 🙏

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  3. बहुत सुंदर

    https://vivj2000.blogspot.com/

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 17 मई 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  5. सुंदर गीत। अपने झारखंड दूरदर्शन परिवार को प्रणाम।

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    1. बिल्कुल आज के समय में ऐसे जागरुकता कार्यक्रम को बढ़ावा देने और समाज की सोच में सकरात्मक बदलाव लाने की दिशा में दूरदर्शन की महत्ती भूमिका रही है । आज के समय में जब छोटे बच्चे मोबाइल पर वीडियो गेम्स और कार्टून देखने में अपना समय और बुध्दि का क्षय करते है तो उनके माता - पिता व बड़ों को चाहिए कि उनके बीच इस तरह के प्रेरक कार्यक्रम को प्रस्तुत करे और इस अभियान को आगे ले जाए ।

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