जीवन खेल का मैदान है
हार - जीत तो बस एक मुकाम है
चलते रहना , आगे बढ़ते रहना
हौंसले और इरादे की पहचान है
हर पल आँखों में सपना पलता
मुसाफिर वहीं है , जो न रुकता
सर पर धूप हो बारिश का जोर हो
हो पथरीली राह डगर कितनी ही दूर हो
सवेरा होता है इस मैदान में
तो शाम होती है इस मैदान में
एक खिलाड़ी का खेल प्रदर्शन
जीत - हार के बाद
केवल एक स्कोर नहीं होता
आँखों की नींदी पैरों की थकान
और मम्मी - पापा का प्यार
सबकुछ से मिलकर
मैदानी जीवन की हकीकत
को कहते , बढ़ते रहते , चलते रहते
हार - जीत को प्रणाम करते
जीवन को जीना सीखाते है , ये
केवल स्कोर नहीं मेरे भैया की पहचान है
एक खिलाड़ी जीवन का परिचय
और आगे बढ़ते जाने का साहस अविराम है ।

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