हर मुसीबत अपने साथ एक प्रकाश का छिपा कोर लाती है
हताशा को हराकर देखना , रोशनी वही नजर आती है
मुकाम के पीछे भागती रहती है दुनिया , वहीं बस्ती अंधेरी
खामोशी में जीवन की कहानी के ऐसे - ऐसे किरदार निभाती है
वक्त से पहले जिम्मेदारियों का अहसास अगर कराती है ,
गलती करते है आप , वक्त रहते हमको ये हिम्मती बनाती है
हर घड़ी अपना वजूद लिखती अपने को जीती जिंदा कहानियाँ ये
मुसीबतों के सन्नाटों में कोई अपना रचा हुआ अभंग सुनाती है ।

सुंदर प्रेरणात्मक रचना
जवाब देंहटाएंहार्दिक स्वागत अनीता जी !
हटाएंसुंदर एवं सकारात्मक रचना।
जवाब देंहटाएंसंघर्षों के बीच अपनी आंतरिक शक्ति पहचान कर जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ सितंबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।